कठिन समारोह 2026
अरण्य संघाराम का दूसरा कठिन समारोह पूजनीय लुआंग पोर लियम, आचार्य केवली तथा अन्य संघ सदस्यों की उपस्थिति में संपन्न होगा। लुआंग पोर 29 अक्टूबर को संघाराम पधारेंगे और 3 नवंबर को प्रस्थान करेंगे।
कठिन क्या है?
प्रत्येक वर्ष तीन महीने के वर्षावास (Vassa) के समापन के बाद बौद्ध समुदाय कठिन की परंपरा मनाता है—यह उदारता और कृतज्ञता का एक विशेष अवसर है। वर्षावास के दौरान भिक्षु और भिक्षुणियाँ एक ही स्थान पर रहकर ध्यान, अध्ययन और आध्यात्मिक साधना के लिए स्वयं को समर्पित करते हैं। इस अवधि के अंत में गृहस्थ श्रद्धालु संघ को चीवर तथा अन्य आवश्यक वस्तुएँ अर्पित करने के लिए एकत्र होते हैं।
“कठिन” शब्द का मूल अर्थ चीवर सिलने के लिए उपयोग किए जाने वाले लकड़ी के ढाँचे से जुड़ा है। आज यह संघ को किए जाने वाले उस विशेष दान का प्रतीक है—जिसमें वस्त्र, भोजन, औषधियाँ और अन्य आवश्यक वस्तुएँ श्रद्धा एवं सद्भाव से अर्पित की जाती हैं।
पुण्य का संवर्धन
कठिन प्रत्येक वर्ष मिलने वाला एक दुर्लभ अवसर है, जब हम उन भिक्षु-संघ के प्रति कृतज्ञता और मैत्री का भाव विकसित कर सकते हैं, जो भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को संरक्षित रखते हैं। यह गृहस्थों के लिए भी उदारता का अभ्यास करने और पुण्य अर्जित करने का एक विशेष अवसर है।
📝 पंजीकरण
कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कृपया यह फॉर्म भरें: पंजीकरण फॉर्म
🗓️ शुक्रवार, 30 अक्टूबर से सोमवार, 2 नवंबर
शुक्रवार, 30 अक्टूबर
- 5:30 प्रातः – प्रातः पूजा (आचार्य केवली द्वारा निर्देशित ध्यान)
- 7:00 प्रातः – नाश्ता
- 8:00 प्रातः – चलते हुए ध्यान (भंते अनवज्जो द्वारा निर्देश)
- 9:00 प्रातः – बैठकर ध्यान / सेवा (सफाई, पौधों की देखभाल आदि)
- 10:30 प्रातः – भोजन से पूर्व की विधियाँ
- 11:00 प्रातः – भोजन एवं विश्राम
- 1:00 दोपहर – चनेती स्तूप की यात्रा
- 5:00 सायं – भिक्षु-संघ के लिए नामपना; गृहस्थों के लिए चाय एवं अल्पाहार
- 7:00 सायं – सायंकालीन पूजा
शनिवार, 31 अक्टूबर — कठिन से एक दिन पूर्व
- 5:30 प्रातः – प्रातः पूजा (आचार्य केवली द्वारा निर्देशित ध्यान)
- 7:00 प्रातः – नाश्ता
- 8:00 प्रातः – चलते हुए ध्यान (भंते अनवज्जो द्वारा निर्देश)
- 9:00 प्रातः – बैठकर ध्यान / सेवा (सफाई, पौधों की देखभाल आदि)
- 10:30 प्रातः – भोजन से पूर्व की विधियाँ
- 11:00 प्रातः – भोजन एवं विश्राम
- 1:00 दोपहर – प्राचीन आदि बद्री मठ के लिए प्रस्थान
- 1:45 दोपहर – बैठकर ध्यान एवं पारायण
- 2:45 दोपहर – संग्रहालय का भ्रमण
- 4:30 सायं – भिक्षु-संघ के लिए नामपना; गृहस्थों के लिए चाय एवं अल्पाहार
- 6:00 सायं – सायंकालीन पूजा (आचार्य केवली द्वारा निर्देशित ध्यान)
- 7:30 सायं – धम्म वार्ता / प्रश्नोत्तर
रविवार, 1 नवंबर — कठिन समारोह
- 5:30 प्रातः – प्रातः पूजा (आचार्य केवली द्वारा निर्देशित ध्यान)
- 7:00 प्रातः – नाश्ता
- 8:00 प्रातः – विहार परिसर में चावल का पिंडपात
- 9:00 प्रातः – सभी श्रद्धालु कठिन अर्पण समारोह के लिए तंबू में एकत्र हों
- 9:30 प्रातः – कठिन अर्पण समारोह का आरंभ
- 10:00 प्रातः – चीवर की सिलाई का आरंभ; समारोह जारी रहेगा
- 11:00 प्रातः – भोजन एवं विश्राम
- 1:00 दोपहर – प्रश्नोत्तरी / गतिविधि
- 4:30 सायं – भिक्षु-संघ के लिए नामपना; गृहस्थों के लिए चाय एवं अल्पाहार
- 6:00 सायं – कठिन संघकम्म (कठिन चीवर का निर्धारण)
- 7:00 सायं – सायंकालीन पूजा (पारायण, ध्यान एवं प्रश्नोत्तर)
सोमवार, 2 नवंबर
- 5:30 प्रातः – प्रातः पूजा (आचार्य केवली द्वारा निर्देशित ध्यान)
- 7:00 प्रातः – नाश्ता
- 8:00 प्रातः – चलते हुए ध्यान (भंते अनवज्जो द्वारा निर्देश)
- 9:00 प्रातः – बैठकर ध्यान / सेवा (सफाई, पौधों की देखभाल आदि)
- 10:30 प्रातः – भोजन से पूर्व की विधियाँ
- 11:00 प्रातः – भोजन एवं विश्राम
- 1:00 दोपहर – प्रश्नोत्तरी / गतिविधि
- 5:00 सायं – भिक्षु-संघ के लिए नामपना; गृहस्थों के लिए चाय एवं अल्पाहार
- 7:00 सायं – सायंकालीन पूजा
मंगलवार, 3 नवंबर
- 5:30 प्रातः – प्रातः पूजा (आचार्य केवली द्वारा निर्देशित ध्यान)
- 7:00 प्रातः – नाश्ता
- 8:00 प्रातः – स्व-अभ्यास ध्यान
- 9:00 प्रातः – बैठकर ध्यान / सेवा (सफाई, पौधों की देखभाल आदि)
- 10:30 प्रातः – साला में विदाई एवं क्षमा-याचना
- 11:00 प्रातः – भोजन
- 1:00 दोपहर – संघाराम से प्रस्थान
📝 पंजीकरण
कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कृपया यह फॉर्म भरें: पंजीकरण फॉर्म
कृपया ध्यान दें
— आवास:
संघाराम विहार में आवास की व्यवस्था अत्यंत साधारण है और कई प्रतिभागियों के साथ साझा करनी होगी। प्रतिभागियों की संख्या अधिक होने के कारण अधिकांश अतिथियों के लिए तंबुओं में ठहरने की व्यवस्था होगी तथा सामान्य साझा स्नानघर उपलब्ध होंगे। जो प्रतिभागी अधिक आरामदायक सुविधाएँ चाहते हैं, वे पास के होटलों में कमरे बुक कर सकते हैं। नीचे पाँच होटलों के सुझाव दिए गए हैं। होटल एम.एम. संघाराम के सबसे निकट है, जबकि अन्य होटल यमुनानगर में हैं, जो विहार से लगभग 45 किमी दूर है।
https://docs.google.com/document/d/1VRwQIHTCmlexToRr6fZIUv0knkTv094IoTey_exPIvw/edit?usp=sharing
— भोजन:
संघाराम में नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात्रि भोजन उपलब्ध रहेगा।
— परिवहन:
परिस्थितियों के अनुसार, अरण्य विहार ट्रस्ट दिल्ली से अरण्य संघाराम आने-जाने के लिए परिवहन की व्यवस्था कर सकता है। दिल्ली से प्रस्थान 30 अक्टूबर को और दिल्ली वापसी 2 नवंबर को प्रस्तावित है।
— दिशानिर्देश:
कृपया विहार में रहने से संबंधित दिशानिर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उनका पालन करें।
— योगदान:
जो श्रद्धालु इस महत्वपूर्ण अवसर के लिए अर्पण / दान करना चाहते हैं, वे इसकी जानकारी संबंधित अर्पण एवं दान पृष्ठ पर प्राप्त कर सकते हैं। Offerings and Donation
हम इस विशेष पुण्य अवसर पर आपकी उपस्थिति की हार्दिक प्रतीक्षा कर रहे हैं।